Reader’s Choice Awards : Nominations 

Hello Everyone ! Wait is over .. I’m not going to waste time writing introductory part coz I thing everyone is gonna scroll down to take a look at nominations. So here we go, Nominations …

Source: Reader’s Choice Awards : Nominations 

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अपने

कभी देखा हैं मुड़ के
चिलचिलाती धूप में
एक छाँव नजर आएगी तुम्हे
तुम्हरे क़दमों से शुरू हो के,

कुछ कदम जो और बढ़ो
तो हँस दोगी तुम कहते हुए,
साथ चल रहे मेरे

और जब खामोश किसी उलझन में देखोगी गौर से, तो बोलोगी, ये क्या, ये  भी मुँह फेर गया मुझ से !!!

बातें :- अनसुनी और अनकही

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क्या तुम मुझे सुन पा रही हो??

वो तुम ही हो न जिसे मैं  अपने तोतले जुबान से  सबसे पहले माँ बोलूंगी, हाँ वहीँ तो हो तुम । तुमने ही तो मुझे आश्रय दे रखा है अपनी कोख में ।

यहाँ बहुत सुरक्षित महसूस करती थी पर अभी अभी जो सुना मैंने, मैं डर गयी ।

वो जो अभी अभी इस कमरे से बाहर निकले शायद वो पिताजी हैं ना, पर वो ऐसा क्यों कह रहे थे उन्हें बेटा चाहिए ।

सुनो न माँ, ये तो मैं हूँ, बेटी तुम दोनों की। माँ तुम दोनों के अंश से ही तो बनी हूँ मैं फिर पिताजी क्यों अपने ही अंश के साथ भेद भाव कर रहे हैं ।

क्या मेरे जन्म से उन्हें ख़ुशी नहीं होगी, मैं तो छोटी सी रहूँगी ना जब इस दुनिया में आऊँगी ।

माँ तुम्हे होश तो रहेगा ना, क्या पता औरों ने मुझे गोद में लेने से इंकार कर दिया तो, तुम्हे होश रहा तो तुम तो कभी इंकार नहीं करोगी ।

पिताजी से कह दो न, वो मेरा स्वागत भी उसी तरह करे जैसे वो सोच रहे हैं, अपने आने वाले बेटे के लिए ।

माँ मेरा दोष तो नहीं है न की मैं बेटी बन के आऊँगी तुम्हारे आंगन में, फिर मुझे कभी सजा भी मत मिलने देना इस बात की ।

पिताजी के बातों से लगता है वो पुराने विचारों के हैं, उन्हें समय के साथ आगे बढ़ने की और नए सोच रखने की जरुरत हैं।

माँ पता है, ये भी हो सकता है पिता जी को लगता होगा बेटियां शायद सुरक्षित नहीं है, पर उन्हें कहना मुझे तुम दोनों के होते डर नहीं हैं और जब मैं बड़ी हो जाऊँगी ना मैं अपने साथ साथ तुम दोनों का भी ध्यान रखूँगी बस अभी तुम मेरा ध्यान रखना ।

माँ उन्हें लक्ष्मीबाई की कहानी सुनाओ ना,बेटी हो के उसने भी तो अपने राज्य के लिए लड़ाई की थी । मैं भी अपनी सुरक्षा के लिए लड़ूंगी ।

माँ मैं जानती हूं , ये दुनिया बहुत ज़ालिम हैं ,हैबनियात  वास करती हैं इंसानो में  पर माँ जहाँ  इंसानियत इस कदर दम तोड़ रही हैं वहाँ इंसानियत के रखवाले भी तो होंगे ना, मैं  सामना कर लूँगी सभी कठिनाइयों  का बस तुम मेरा साथ मत छोड़ना ।

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माँ विज्ञान भी तो बहुत विकास कर गया हैं ना , कहीं ऐसा ना हो विज्ञान का दुरूपयोग हो और मैं जीवन जीने से पहले जीवन खो दूँ ।

माँ तुम ध्यान रखना इन बातों का, मैं अपने वजूद  के लिए तुमपे निर्भर हूँ अभी, आगे चल के मैं अपना खुद का नाम बना लूँगी। ये ही नहीं मैं तुम दोनों को भी नाम रौशन करुँगी पर उससे पहले मुझे एक मौका अवश्य देना ।

मैं तुमलोगों की दुनिया में कदम रखना चाहती हूँ, खुले हवा में सांस लेना चाहती हूँ ।

आज तक तुम्हे महसूस किया हैं, तुम्हे अपनी आँखों से देखना चाहती हूँ । सब लोग मुझे भी देखने को बेचैन होंगे ना, उनसे कहना मैं बस तुम्हारी परछाईं हूँ, उनसे जल्दी ही मिलूंगी ।

माँ मैं तुमसे जितना जुड़ा महसूस करती हूं उतना किसी से नहीं, ये बंधन जीवन भर ऐसा ही बना रहेगा । देखना मैं तुम्हारी रानी बिटिया बन के रहूँगी । पिता जी को भी मेरे ऊपर गर्व महसूस होगा एक दिन ।

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माँ तुम दोनों ही हो मुझे जीवनदान देने वाले , मैं भी जरूरत पड़ने पे आजीवन तुम दोनों की जरूरतें पूरी करुँगी ।

अब तुम आराम करो, मुझे भी आराम मिलेगा ।

जल्दी मिलते है हम तुम सब की दुनिया में तब तक मैं इंतजार करुँगी ।

दहन

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माँ सर्वप्रथम तुझे मेरा नमस्कार हैं,
हैं रूप तेरे अनगिनत, तू क्रोध की मशाल है

ममता की तू मूरत  कभी, कभी पापियों का विनाश हैं,
सुशोभित है पुष्पों से कभी, कभी गले में मुंडों का हार हैं

जननी है तू जग की, सुकर्मियों का तुझसे ही बचाव हैं,
शैलाब हैं माँ तुझसे ही, तुझसे ही जग में  ठहराव हैं

सर्वदा मस्तक झुकाते तेरे चरणों में सब,
रहता ये सवाल सदा ही मन में, तेरी दृष्टी पड़ेगी कब

माँ तू तो महान है, अच्छे बुरे का तुझे ज्ञान है,
दृष्टी तेरी होती सदा ही, सुकर्मियों को तेरा वरदान हैं

ऋषि-मुनियों को तूने बचाया था, असुरों को तूने ही मार गिराया था,
सुरों ने वरदान तुझसे ही पाया था

एक बार फिर से प्रकट हो जा तू,
इस धरती पे पाप बढ़ रहे बहुत

संरचना इस पृथ्वी की थी तुझसे,
ये पृथ्वी क्या अब भी वैसी ही है, एक बार तो नजर डाल तू

इन्सान के लहजे में अब राक्षसों का वास है,
जुल्मों का हो रहा हर जगह बखान है

बढ़ गए है इस धरती पर पाप बहुत
माँ एक बार फिर अवतार ले तू

नौ रातों तक तेरी पूजा की सबने, दहन किया रावण का भी
परंतु खुद के अंदर के रावण को, जलाना जरुरी समझा नहीं

दहन हो गया जिस रावण का ,उसके दहन का अब क्या फल
जल जाये भीतर का रावण सबमें, माँ दे बस ये वर

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बचपना

तू छोड़ गया जीवन के एक नए पथ पर
पर तेरी यादों ने कहाँ अकेला छोड़ है मुझे

बढ़ते वक़्त के साथ बीत गया है तू
पर आज भी कुछ पल तेरी यादों को दूँ

देखते नहीं तुझको, मुझमें अब लोग
पर मैंने तुझको सदैव ही खुद में पाया है

अनमोल पल तू जीवन का
तुझे खुद में मैंने कही छुपाया है

नजर जाते ही किसी नन्हे बच्चे पे
मुझमें भी तू कहीं जग जाता है

किलकारियों में उनके,
मुझे मेरा बचपन नजर आता है

बेफिक्रे, वो मासूम से
खुद में ही कहीं गुम से

अंजान वो आने वाले कल से
सहम न जाये कहीं बड़े होने के डर से

ठहाके उनके दबी मुस्कान बन जायेंगे
तेरे बित जाने पे, वो खुद को अकेला पाएंगे

झलक वो निश्चिन्तता की चेहरे पे सोते वक़्त
तब कहाँ नजर आएगी
सोते वक़्त भी उन्हें कल की ही फ़िक्र सताएगी

वो बचपन जिसमे माँ की गोद और पापा के कंधे थे
वो बचपन कहाँ उस वक़्त दोबारा मिल पायेगी

दब जायेगा बचपन कहीं, नए उम्र के तले
रोना चाहेगा दिल तुझसे लग के गले

तब याद करेंगे वो भी तुझे, जैसे मैं करती हूँ
तब महसूस करेंगे वो तुझे, जैसे मैं करती हूं

एहसास तेरे होने का, चेहरे पे उनके नयी मुस्कान लायेगा
बचपन बीत जायेगी, पर बचपना कहाँ जायेगा

Perspective

                  Laying beside him
         Staring at the brightest star
             Beautiful it is, isn”t it
                     Said she
            Amazingly beautiful
                     He said
           While gazing at her. 

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