बचपना

तू छोड़ गया जीवन के एक नए पथ पर
पर तेरी यादों ने कहाँ अकेला छोड़ है मुझे

बढ़ते वक़्त के साथ बीत गया है तू
पर आज भी कुछ पल तेरी यादों को दूँ

देखते नहीं तुझको, मुझमें अब लोग
पर मैंने तुझको सदैव ही खुद में पाया है

अनमोल पल तू जीवन का
तुझे खुद में मैंने कही छुपाया है

नजर जाते ही किसी नन्हे बच्चे पे
मुझमें भी तू कहीं जग जाता है

किलकारियों में उनके,
मुझे मेरा बचपन नजर आता है

बेफिक्रे, वो मासूम से
खुद में ही कहीं गुम से

अंजान वो आने वाले कल से
सहम न जाये कहीं बड़े होने के डर से

ठहाके उनके दबी मुस्कान बन जायेंगे
तेरे बित जाने पे, वो खुद को अकेला पाएंगे

झलक वो निश्चिन्तता की चेहरे पे सोते वक़्त
तब कहाँ नजर आएगी
सोते वक़्त भी उन्हें कल की ही फ़िक्र सताएगी

वो बचपन जिसमे माँ की गोद और पापा के कंधे थे
वो बचपन कहाँ उस वक़्त दोबारा मिल पायेगी

दब जायेगा बचपन कहीं, नए उम्र के तले
रोना चाहेगा दिल तुझसे लग के गले

तब याद करेंगे वो भी तुझे, जैसे मैं करती हूँ
तब महसूस करेंगे वो तुझे, जैसे मैं करती हूं

एहसास तेरे होने का, चेहरे पे उनके नयी मुस्कान लायेगा
बचपन बीत जायेगी, पर बचपना कहाँ जायेगा

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25 thoughts on “बचपना

  1. Rakesh Ranjan Yadav says:

    Bhaut khoob Mahima ek br Bachpan fir yaad dila di,sahi mai Bachpan kitna aacha tha na koyi tension,na kl ki soach,kitni pyari jindgi thi
    Missed my childhood on the occasion of childrens day
    And Happy Childrens Day @mahi…

    Like

  2. Anonymous says:

    Bhaut khoob Mahima ek br Bachpan fir yaad dila di,sahi mai Bachpan kitna aacha tha na koyi tension,na kl ki soach,kitni pyari jindgi thi
    Missed my childhood on the occasion of childrens day
    And Happy Childrens Day @mahi…

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