अपने

कभी देखा हैं मुड़ के
चिलचिलाती धूप में
एक छाँव नजर आएगी तुम्हे
तुम्हरे क़दमों से शुरू हो के,

कुछ कदम जो और बढ़ो
तो हँस दोगी तुम कहते हुए,
साथ चल रहे मेरे

और जब खामोश किसी उलझन में देखोगी गौर से, तो बोलोगी, ये क्या, ये  भी मुँह फेर गया मुझ से !!!

Advertisements

21 thoughts on “अपने

Comments are closed.