Thought :- two

Excepting our faults are not always because of our guilts sometimes it is because of innocency of others.

                                            

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Light

My beliefs reflects me,
My inner soul and my ethics

It is like shiny polished mirror
No matter if it breaks in to several peices it would always be reflecting.

Yes it would hurt, if i will try to made it the same as earlier it was
But it would not hurt, if i quietly choose to be reflected.

Reflection chosen, keep breaking me in to peices, it would not effect me.

                                            

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मासूमियत

चार लड़कों के बाद वो घर की पहली लड़की थी तो वाजिब था दुलारी होना । सब की लाडली पर किसी को तो जान से ज्यादा प्यारी थी ।

वो कहते है सूद से प्यारा मूड होता है, हाँ शायद तभी वो दादी के आँखों का तारा थी । जितना प्यार माँ बाप से ना मिला होगा उतना उसकी दादी से मिलता था। ऐसा लगता था जैसे वो बूढी औरत उसपे जीवन का बचा हुआ प्यार उधेल देना चाहती थी । वक़्त गुजरता गया वो भी बढती गयी । एक नन्ही कली अब धीरे धीरे खिलने लगी उस आंगन में, वातावरण भी काफी साथ दे रहा था ।

देखते ही देखते चार साल की हो गयी, एक बेजुबान जिसकी किलकारी से घर गुंजित हो उठता था अब तो उसकी तोतली जवान से फरमाइश भी निकलने लगी । बड़ा मधुर मालूम होता था उसका स्वर और फरमाइश भी प्यारी होती थी उसकी । कहनियाँ सुनना उनमे से एक थी।

रात के प्रहर जब तक दादी से कहानी ना सुन ले, कहाँ उसकी आँखों में नींद झलकती थी । अनगिनत कहानियाँ सुनने के बाद एक कहानी उसे बेहद ही पसंद आ गयी ।

एक पारस पत्थर की कहानी, जिसके स्पर्श मात्र से मुर्दे भी जीवित हो जाते थे । फिर क्या था उसकी तोतली जुबान से एक ही वाक्य निकला, दादी माँ, मैं भी ये पत्थर ले आऊँगी तुम्हरे लिए । तुम्हे कभी मरने ना दूंगी ।

इतना कह के दोनों मुस्कुरा दिया, फर्क इतना था दादी की मुस्कराहट का कारण उसकी पोती का बचपना था और पोती के मुस्कराहट का कारण की उसकी दादी उससे कभी दूर नहीं होगी ।

उसकी नन्ही दिमाग में ये बात घर कर चुकी थी की दादी ने जो उसे बताया है वो सच है और पारस पत्थर भी अवश्य  ही होगा । सब से कहते फिरती उस पत्थर के बारे में और सब उसके नादानी पे मुस्कुरा देते, उसका विश्वास और भी पक्का हो जाता । ऐसा सोचती हूँ यदि उसे तभी ही बता दिया जाता की ये सब कल्पना मात्र है तो शायद हालात कुछ और होते ।

वो समय भी नजदीक आ गया, जब वो सच्चाई जान जाती पर भगवान को तो कुछ और ही मंजूर था ।

एक दिन अचानक दादी की तबियत बहुत बिगड़ गयी, अस्पातल ले जाना पड़ा । बच्ची को ले जाना उचित न समझा गया, दादी को पुरे घर में खोज रही थी तब माँ ने बताया दादी की तबियत थोड़ी बिगड़ गयी है इसलिए चिकित्सक के पास गयी है थोड़ी देर में वापस आ जाएगी ।

हाजिरजवाब काफी थी वो,तुरन्त कह दिया क्यों चिकित्सक क्यों, वो पत्थर तो विश्व भर में एक है और वो मेरे पास है । मुझे ले चलो दादी के पास मैं उन्हें तुरंत ठीक कर दूंगी ।

माँ ने बड़ी हैरानी से देखते हुए पूछा,कौन से पत्थर की बात कर रही तू ?

वो माँ को कमरे में ले गयी और एक रंगीन पत्थर दिखाया, वो पारस पत्थर तो न था पर जिस विश्वास से उसने पत्थर को सहेज के रखा था वो उसका प्रेम और विश्वास था उसके दादी के प्रति, बहुत ही अनमोल ।

माँ के आँखों में आँसू थे,बेटी ने आँसू पोछ्ते हुए अपनी लड़खड़ाती जुबान में कहा, ये पथल तो मैं मच्छी वाले घर से लायी हूँ, अचानक माँ को याद आया की हाल ही मैं शीशे वाले वो मछली का घर फुट गया था, उसमे तो कई रंग बिरंगे पत्थर थे और जो पत्थर उसकी बेटी के कल्पना से ज्यादा मेल खाती होगी उसने वो पत्थर उठा के रख दिया ।

शाम तक जब दादी लौट के नहीं आई, उसने जिद मचा दी दादी से मिलने की, अंततः उसे ले के अस्पताल जाना पड़ा । कमरे में जाते मात्र ही उसने दादी को वो पत्थर दिखाते हुए कह, देखो मैं क्या लायी हूँ और उस पोती के चेहरे में दादी को बीतीं बातें दिखनी लगी, बहुत ही सुकून मिला होगा शायद तभी तो अब तक जो चिकित्सक बता रहे थे की रक्तचाप बहुत ही बढ़ा हुआ है, दवा भी असर नहीं कर  रहे वो ही चिकित्सक ने कहा शायद अब दवाओं का असर शुरू हो गया है ।

Thought :- one

Realizing the mistakes of our is not always our greatness sometimes it is the goodness of other that let us feel our mistakes.

                                       

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Words are not always important

Speechless she was, at the moment
She realized all her faults

Silence outside, screams inside
She was sorry for all her deeds

Not even able to say sorry
Just kept looking in to his eyes

And all of sudden waterfall broke through her eyes
Silence continued, tears with the flow spoken all

Her Eyes closed,a warmth touch over her face
He, Wiping her tears gently

No words just true emotions
No sorry ,still forgiven

Her life her choice

Carrying a fake smile on her face, her decision
Eversmiling she is, people judgement
Finding the reason behind her fake smile, his motive

Hiding her tears from others, her maturity
Selfsufficient she is, people judgement
Wiping her tears, his wish

Keeping quiet, her choice
Less she speaks, people judgement
Listening to her problems someday, his  desire

Never she wanted to reveal the REAL HER
As Contradictory would be she, according to people assumption
He simply asked her, to be real rather than being assumed

Life would be harder then, she replied
Even hard time would make you stronger, he said
Hard time made me such, she interrupted

He got all his answers and left silently.